बतौर चीफ गेस्ट मेरा पहला कार्यक्रम, नवोदय विद्यालय वैशाली समारोह के संस्मरण

नमस्कार साथियो,
kuch behad azeez aur yaadgaar pal aapse saanjha karna chahti hu. Mujhe Navoday Vidyalay, Vaishali ke Annual Day [26th April] me bataur Chief Guest aamantrit kiya gaya. Yah mere jeewan ke sabse sukhad palo me se ek hai. Bas apni khushi aapse baant rahi hu.
26th April ko  अहले सुबह, नवोदय के शिक्षक कार लेकर घर पर आये मुझे ले जाने के लिए. मैं बेहद nervous थी. मैंने हमेशा chief गेस्ट को receive किया था आज तक. खुद chief गेस्ट बनकर पहली बार जा रही थी.

कार जैसे ही स्कूल गेट तक पहुंची, खुद प्रिंसिपल साहब, हेड बॉय तथा हेड गर्ल ने NCC कैडेट्स के साथ मुझे स्काउट सलामी दी. बिलकुल वैसे ही जैसे किसी बड़े नेता या अति विशिष्ट अतिथि के आने पर दी जाती है. हेड ऑफ़ बॉय स्काउट का आदेश हुआ - सीधे मुड़! सलामी  दे! फिर आगे बढ़कर स्कूल की मुख्या बिल्डिंग में पहुंचे तो वह सारी girls गाईड खड़ी थी. हेड गर्ल गाईड का आदेश  हुआ स्वागत स्काउट ताली और सारी लड़कियों ने एक स्वर और लय में स्काउट ताली बजानी शुरू कर दी. ये सब मैंने सपने में भी कभी नहीं सोचा था. मेरे साथ साथ प्रिंसिपल साहब, स्कूल के बॉय कप्तान और गर्ल कप्तान चल रहे थे. पीछे मम्मी और पापाजी थे. स्कूल की मैं बिल्डिंग के सामने पहुँचते ही तीन लडकियां मिली जो हाथ में एक बड़े से थाल में फूल और चन्दन लेकर खड़ी थी. उन्होंने मुझे तिलक लगाकर मेरा स्वागत किया. फिर वहाँ  से प्रिंसिपल साहब के साथ हम लोग उनके केबिन में पहुंचे. वहा हमलोगों ने हल्का नाश्ता किया. प्रिंसिपल साहब को अब तक सारी जानकारी लोगो के द्वारा ही मिली थी. उन्होंने मुझसे वहाँ  पर मेरी पढ़ाई लिखाई, लेखन के प्रति मेरा झुकाव और बाकी कई सवाल पूछे. उन्होंने ही बताया की मीटिंग करके और छात्रो की मांग पर ही मुझे इस बार बुलाया गया था. प्रिंसिपल साहब ने कहा की मुझे बुलाने के पीछे उनकी यही मंशा है की सभी छात्र तथा छात्राओं को प्रेरणा मिल सके.

फिर वहाँ से स्कूल की library और science लैब घुमते हुए हमलोग creative कॉर्नर पहुंचे जहां मैंने ribbon काटी. मुझे इतनी ख़ुशी हो रही थी. सारे बच्चे मुझसे मिलने के लिए, बात करने के लिए, अपनी बनायी हुई चीज़े दिखाने के लिए उत्सुक थे. इतना अच्छा लग रहा था. किसी ने turbine बनाया था. किसी ने मॉडल village बनाया था. किसी ने ideal रेलवे platform तो किसी ने सोलर सिस्टम बनाया था. बहुत अच्छा लगा ये सब कुछ देख कर. मैंने हर मॉडल देखा और हर बच्चे की तारीफ़ की. दर असल मैं सोच कर ही गयी थी जब ये लोग मुझे इतना सम्मान दे रहे है तो मैं भी इनके दिन को यादगार बनाऊ. क्यूंकि मैंने खुद भी स्कूल में ऐसे समारोह को होस्ट किया है मुझे पता था की जब chief गेस्ट का attention न मिले तो कितना दुःख होता है. इसलिए मैं हर बच्चे से मिली और उनके चेहरे पर जो ख़ुशी थी वह बयान करने के लिए शब्द नहीं है मेरे पास.

फिर वहा से हमलोग भगवान् बुद्ध की प्रतिमा तक गए और पहले मैंने फिर मेरे बाद प्रिंसिपल साहब ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. उसके बाद हम लोग समारोह भवन में चले. हमारे दोनों तरफ स्काउट और NCC परेड कर रहे थे. बीच बीच में प्रिंसिपल साहब भी बात कर रहे थे. उन्होंने कहा की आज से पहले कोई गेस्ट बच्चो से इतनी गर्मजोशी से नहीं मिला. मैंने सारे शिक्षको के चेहरों  पर ख़ुशी देखी. वे सब लोग मम्मी और पापाजी से बात कर रहे थे. [ मेरा अंदाजा है की मेरी तारीफ़ ही कर रहे होंगे :)]



समारोह भवन में पहुँचते ही मुझे आश्चर्य हुआ की सारे बच्चे जो लैब में मिले थे, सब वहाँ पहले से ही पहुँच चुके थे. हमारे पहुँचते ही सब लोगो ने खड़े होकर तालियों से हमारा स्वागत किया.
समारोह शुरू हुआ स्वागत भाषण और मुझे बुके तथा शॉल भेंट के करने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ. बहुत अच्छे  अच्छे कार्यक्रम थे. और इन्हीं में एक कार्यक्रम था स्कूल के तीन बच्चो द्वारा मेरा interview . दो स्टुडेंट्स वंदना और उत्पल मेरा हिंदी में इंटरव्यू लेने आये. उनके हाव भाव से मुझे पता चल गया की इन दोनों ने न सिर्फ काफी रिहर्सल की है बल्कि बहुत ज्यादा घबराए हुए भी है. मैंने सोच लिया की इनसे दोस्तों की तरह ही बात करनी है. उन्हें कुल २५ सवाल पूछने थे और यह मुझे पता चला उस कागज़ से जो वह दोनों लेकर आये थे. लेकिन इंटरव्यू जब शुरू हुआ तो क्या कहू २५ की जगह दोनों ने ४०-४५ प्रश्न पूछ डाले. इतने खुश हो गए की जो मन  में आया बस पूछ डाला. सारे सवाल तो याद नहीं है लेकिन जो याद है वो बता रही हू. एक सवाल था की अक्सर बेटा बेटी में फर्क किया जाता है क्या आपके साथ ऐसा हुआ? मैंने जवाब दिया की ये सच है की लोग बेटे के जन्म को कृष्ण का अवतार मानते है लेकिन ये भी सच है की बेटी के जन्म को लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. और जहां तक मेरी बात है तो बहुत लोगो का मानना है की "पहली बेटी धन की पेटी". मेरे साथ ऐसा ही हुआ. पूरा हौल  ठहाको से गूँज उठा. एक और सवाल था की मेरे लेखन के प्रति मेरे माता पिता की क्या प्रतिक्रिया थी और उनकी बेटी होने के नाते मुझे उनका कितना सहयोग मिला? मैं इसके जवाब में उनसे कहा की पहले आप ये बताइये की इन प्रश्नों को तैयार करने में आपको किनसे सहयोग मिला? इतना सुनते ही दोनों खिलखिला के हंस पड़े  और उनके साथ साथ सारे मौजूद लोग भी जोर से हँसे. प्रिंसिपल साहब और शिक्षको के चेहरों पर गर्व के भाव आ गए. फिर मैंने भी उनकी तारीफ़ करते हुए कहा की मेरा इंटरव्यू बहुत लोगो ने लिया है. देशसे भी और विदेश से भी. लेकिन ये इंटरव्यू मेरे लिए उन सबसे ज्यादा यादगार रहेगा. कहने की ज़रूरत नहीं सभी नवोदय स्टाफ की कितनी गौरवान्वित प्रतिक्रिया मिली. फिर मैंने उनके सवाल का जवाब भी दिया. एक और सवाल था की सफलता के क्या मायने है? मैंने कहा की हर व्यक्ति के लिए सफलता के लिए अलग अलग मायने होते है. मेरे लिए - अगर मेरी मम्मी मुस्कुराए तो ये मेरी सफलता है. मेरे पापाजी का सर गर्व से ऊँचा हो तो ये मेरी सफलता है. मेरे भाइयो को किसी भी परेशानी के समय मेरी याद आये  तो ये मेरी सफलता है और आज मैं जवाहर नवोदय विद्यालय में चीफ गेस्ट की हैसियत से आपसे बात कर रही हू, यह भी मेरी सफलता है. दोस्तों, मैंने देखा तो नहीं लेकिन मम्मी बता रही थी की मेरे इस जवाब पर प्रिंसिपल साहब सहित सभी शिक्षको ने खड़े होकर तालियाँ बजाई. मम्मी का कहना था की प्रिंसिपल साहब भावुक हो गए थे.

इसी तरह अंग्रेजी इंटरव्यू हुआ. बच्चे को पूछने थे ७ सवाल उसने पूछ डाले २० सवाल. मैं भी जवाब देती गयी सो उसका उत्साह आसमान पर जा पहुंचा. इसके बाद पुरस्कार वितरण समारोह हुआ. और उसके बाद गर्ल कप्तान, बॉय कप्तान और प्रिंसिपल साहब ने मुझे मेमेंटो भेंट किया. जैसे ही प्रिंसिपल साहब ने मुझे मेमेंटो दिया वैसे ही मैंने झुक कर उनके पैर छू लिए. साथियो, मैंने बहुत मुश्किल परिस्थितियों में पढाई की है और वह भी कई बार teacher के बिना इसलिए मैं जानती हू की शिक्षक की भूमिका कितनी महत्त्वपूर्ण होती है. मैं प्रिंसिपल साहब के व्यक्तित्व से इतनी प्रभावित थी की स्वतः उनका आशीर्वाद लेने की इच्छा हो गयी. प्रिंसिपल साहब बोले की हमने आपका सम्मान करने के लिए आपको बुलाया था लेकिन आप ही हमें इतना सम्मानित करके जा रही है. ऐसा नवोदय के इतिहास में कभी नहीं हुआ की किसी चीफ गेस्ट ने प्रिंसिपल को इतना सम्मान दिया हो. जिस उम्मीद से आपको बुलाया था उससे कही ज्यादा आपने दिया और बच्चों के सामने आपने ऐसी मिसाल रखी है की वो कभी नही भूल पायेंगे. हम आपको फिर बुलाना चाहे तो मैडम समय ज़रूर निकालिएगा.

मैं भी बहुत ज्यादा खुश थी. बाद में मम्मी ने बताया की जैसे ही मैंने प्रिंसिपल सर के पैर छुए वैसे ही सारे शिक्षक गदगद होकर खड़े हो गए तथा announcer महोदय भी भावुक हो गए. मम्मी ने पूछा की पहले से सोचा था क्या? मैंने कहा नहीं अचानक इच्छा हुई. मम्मी बोली बहुत अच्छा किया.
इसके बाद औटोग्राफ लेने के लिए भीड़ इकट्ठी हो गयी. मैं तो गदगद थी. मैंने सबको शुभकामना सन्देश के साथ औटोग्राफ दिए. उसके बाद लंच हुआ और जब हम लोग निकल रहे थे तो सारे बच्चो और स्टाफ ने हमारी गाडी को घेर लिया. बहुत ही अच्छा रहा सारा अनुभव.

प्रिंसिपल महोदय ने कहा है की वे इस पूरे कार्यक्रम की एक अलग पुस्तिका बनवायेंगे और इसको भारत के सभी नवोदय विद्यालयों में भिजवाएंगे. दोस्तों, अभी तो मेरे पास कोई फोटोग्राफ नहीं है लेकिन जैसे ही मिलेंगी आप सबसे सांझा करुँगी.


आशा है की इस मेल ने आपको इस मेल से आपको पूरे कार्यक्रम का ठीक ठाक अंदाजा लग गया होगा. मैंने ये सारी बाते सिर्फ आप लोगो से ही सांझा की है. इसका कारण है. एक हालिया अनुभव से मैंने सीखा है अपनी खुशियाँ उनके साथ ही बांटनी चाहिए जो आपकी ख़ुशी में खुश हो, हर किसी के साथ ख़ुशी बांटने से हो सकता है की ख़ुशी को नज़र लगा जाए जो मैं नहीं चाहती. मुझे आशा ही नहीं पूरा विश्वास है की आप सब मेरी ख़ुशी में मुझसे भी ज्यादा खुश है इसलिए आप लोगो से अपनी ख़ुशी बाँट रही हू.

आपकी स्नेहा

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Comment by Sneha Gupta on April 30, 2012 at 8:46am

Thank you Akash ji

Comment by Sneha Gupta on April 30, 2012 at 8:46am

Thank you Tarkeshwar ji

Comment by Aakash Arjuna on April 29, 2012 at 10:46pm

many many Congratulations Sneha, you have made Bihar very Proud. And always remember, "Greatness can be achieved by anyone but Real Great Person is thy who sustains that Greatness." I hope you will continue writing and mesmerize all of us with your great literary works in Future. Wish you all the best.

Comment by Dr Tarkeshwar on April 29, 2012 at 10:15pm

Sneha ji..log jis mukaam ko paane me apni saari umar laga dete hai use aapne itne kam umra me paa liya....Chief guest banna wo bhi Navogay vidayalay ka khud me 1 bahut badi baat hai...hum aasa karte hai ki ye sirf aapki shuruaat ho aur aage aapko dher saari manzile aur mile... with best wishes...

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