Jitmohan Jha's Blog (9)

होली की हार्दिक बधाई....

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(१) रंग उराए पिचकारी....

रंग से रंग जाए दुनियाँ सारी...

होली के रंग आपके जीवन को रंग दे...

ये शुभ-कामनाएँ हैं…

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Added by Jitmohan Jha on March 17, 2011 at 1:35pm — No Comments

हमें न मोहब्बत मिली, न प्यार मिला...

(१) उल्फत की जंजीर से डर लगता हैं !

कुछ अपनी ही तकदीर से डर लगता हैं !!

जो जुदा करते हैं, किसी को किसी से !

हाथ की बस उसी लकीर से डर लगता हैं !!



 

(२) कोई दोस्त कभी पुराना नहीं होता !

कुछ दिन बात न करने से बेगाना नहीं होता !!

दोस्ती में दुरी तो आती रहती हैं…

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Added by Jitmohan Jha on March 5, 2011 at 12:19pm — No Comments

शिव के पौराणिक शिवालय....

यूँ तो प्रत्येक शहर और गाँवों में शिव के अनेकों शिवालय है, जिनमें से अधिकतर का अपना अलग पुरातात्विक और पौराणिक महत्व भी है। पुराणों में बारह ज्योर्तिलिंग के अलावा भी शिव के पवित्र स्थानों का उल्लेख मिलता है। प्रत्येक स्थान से जुड़ी अनेक कथाएँ हैं तथा इसका खगोलीय महत्व भी है। हम जानते हैं कि प्रमुख रूप से भगवान शिव के कौन-कौन से स्थान…

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Added by Jitmohan Jha on March 3, 2011 at 6:00pm — No Comments

राम हैं भारत की आत्मा.....



'राम’ यह शब्द दिखने में जितना सुंदर है उससे कहीं महत्वपूर्ण है इसका उच्चारण। राम कहने मात्र से शरीर और मन में अलग ही तरह की प्रतिक्रिया होती है जो हमें आत्मिक शांति देती है।



राम ने 14 वर्ष वन में रहकर भारतभर में भ्रमण कर भारतीय आदिवासी, जनजाति, पहाड़ी और समुद्री लोगों के बीच सत्य, प्रेम, मर्यादा और सेवा का संदेश फैलाया। यही कारण रहा की राम का जब…
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Added by Jitmohan Jha on March 1, 2011 at 4:00pm — 1 Comment

कृष्ण है सनातन पथ....

कृष्ण को ईश्वर मानना अनुचित है, किंतु इस धरती पर उनसे बड़ा कोई ईश्वर तुल्य नहीं है, इसीलिए उन्हें पूर्ण अवतार कहा गया है। कृष्ण ही गुरु और सखा हैं। कृष्ण ही भगवान है अन्य कोई भगवान नहीं। कृष्ण हैं राजनीति, धर्म, दर्शन और योग का पूर्ण वक्तव्य। कृष्ण को जानना और उन्हीं की भक्ति करना ही हिंदुत्व का भक्ति मार्ग है। अन्य की भक्ति सिर्फ भ्रम, भटकाव और निर्णयहीनता के मार्ग पर ले…

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Added by Jitmohan Jha on March 1, 2011 at 4:00pm — 2 Comments

मूड के लि‍ए मेकओवर....

तनाव भरे और प्रतिस्पर्धी दौर में मूड का ऊपर-नीचे होना बहुत सामान्य है। मूड को ठीक करने के लिए तमाम तरह के उपाय खोजे गए हैं और जा रहे हैं। ध्यान, संगीत, शौक, अध्यात्म या फिर खाने-पीने की आदत में सुधार, योग और कई तरह की थैरेपी… ये सब कुछ तो पुरानी बातें हैं, अब मूड ठीक करने के लिए आ गया है मेकअप…।

 

जी हाँ, अब तक तो मेकअप खूबसूरत लगने के लिए किया जाता रहा है और इस बात की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि मेकअप से मूड का कभी कोई संबंध होगा,…

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Added by Jitmohan Jha on March 1, 2011 at 12:30pm — No Comments

मजाक (मैथिली कथा) - जितमोहन झा...

हमरा गाम मे एगो पंडीजी काका छलाह, ओ एतेक मजाकिया छला जुनि पुछू .... मजाक करै मे दूर - दूर तक हुनक चर्चा होइ छन्हि ! सच पुछू तँ मजाक करै मे ओ किनको नञि छोड़ैत छथिन्ह !



एक दिनक बात छल हुनक अर्धांग्नी (पंडीतैन) हुनका कहलखिन अहाँ सभसँ मजाक करै छी ... एतऽ धरि जे मजाकक मामला मे दूर - दूर तक अहँक चर्चा होइत अछि ! मुदा अहाँ हमरासँ कहियो मजाक नञि केलहुँ ......



पंडीजी काका बजलाह ... देखू सुनेना के माय, ई बात सत्य अछि जे हम सभसँ मजाक करै छी ! एकर मतलब ई थोड़े ने की हम अहूँसँ मजाक करी…

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Added by Jitmohan Jha on February 25, 2011 at 11:39am — No Comments

मधुक एक ठोप (मैथिली कथा) - जितमोहन झा...

कुरुक्षेत्रक भीषण रक्तपातक बाद, अपन सभ पुत्र गवाँ चुकल शोकसँ संतृप्त धृतराष्ट्रक दुःख विदुरक समक्ष अश्रुधाराक रूपमे बहि निकललनि ! तखन ओऽ सेविका पुत्र (विदुर) हुनका समक्ष वर्तमान स्थितिक अनुकूल एक उपदेशात्मक नीति-कथाक वर्णन केलखिन !



विदुर कहलखिन "आइ एकटा ब्राह्मणक कथा अपनेकेँ बताबैत छलहुँ ! जे जंगली पशुसँ भड़ल जंगलमे पथ - भ्रमित भऽ गेलखिन रहए ! शेर आर चिता, हाथी आर भालूक चीख, चिंघाड़, आर गर्जनक एहन दृश्य जे मृत्युक देवता, यमोक मोनमे सिहरन पैदा कऽ दैतियनि! ब्राह्मणोकेँ ओऽ…

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Added by Jitmohan Jha on February 25, 2011 at 11:36am — No Comments

खिस्सा जीवनक (मैथिली कथा) - जितमोहन झा...

एक आदमीक घर एक सन्यासी पाहुन बनि कs एलखिन। रातिमे गपशपक बीच ओऽ संन्यासी आदमीसँ कहलखिन की अहाँ एहि ठाम ई छोट-मोट खेतीमे की लागल छी ! साइबेरियामे किछु दिन पहिने हम यात्रा पर रही, ओइ ठाम जमीन एतेक सस्ता अछि मानू अहाँकेँ मँगनीम्वे भेट जाएत! अहाँ अपन ई जमींन बेचि कऽ साइबेरिया चलि जाऊ ! ओहिठाम हजारो एकड़ जमीन भेट जाएत एतबे जमीनमे !



ओइ ठामक जमीन बड उपजाऊ छइ, आर ओइ ठामक लोक एतेक सीधा-साधा की करीब-करीब जमींन मुफ्तेमे दऽ देत! ओइ आदमीकेँ वासना जगलनि! ओऽ दोसरे दिन अपन सभ जमीन बेचि कऽ…

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Added by Jitmohan Jha on February 25, 2011 at 11:01am — No Comments

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