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महंगाई खाए जात है ...

शेखर झा 

वर्तमान समय में दिनों-दिन जिस तरह से सभी चीजों के दाम में वृद्धि हो रही है, बढ़ती महंगाई और वेतन कम वाले किस तरह एडजस्ट कर पाते हैं, ये सब ग्यारहवीं क्लास के स्टूडेंट्स ने बहुचर्चित फिल्म ‘पीपली लाइव’ के गाने महंगाई डायन खाए जात के माध्यम से डांस करके प्रदर्शित करके दिखाया। मौका था शंकरनगर स्थित…
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Added by shekhar jha on February 27, 2011 at 10:29am — No Comments

shekhar

hamara blog hai
ekaawajmithilake.blogspot.com

Added by shekhar jha on February 27, 2011 at 10:27am — 1 Comment

जरा इन बातो पर ध्यान दे

शेखर झा 

कुछ विचित्र सी खबरें पढ़ने को मिलती हैं। खबर यह होती है कि अमूक विद्यार्थी ने आत्महत्या कर ली, क्योंकि उसे अच्छी अँगरेजी नहीं आती थी। यह भी खबर पढ़ने को मिलती है कि उसने आत्महत्या कर ली, क्योंकि उसकी प्रेमिका ने उसे ठुकरा दिया या प्रेमी से उसकी शादी नहीं हो सकी। यह पढ़कर न केवल गहरा दुःख होता है, बल्कि धक्का…
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Added by shekhar jha on February 26, 2011 at 10:37am — 1 Comment

यूपी के एक स्कूल में गाया जाता है 'नया राष्ट्रगान'

उत्तर प्रदेश के आंबेडकर नगर जिले में एक प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट ने अपनी तरफ से राष्ट्रगान में बदलाव कर दिए हैं। यहं बच्चों से यह नया राष्ट्रगान गवाया जा रहा है।

जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर टांडा कस्बे के लॉर्ड बुद्धा आंबेडकर अर्जक मिशन पब्लिक स्कूल के छात्र विद्यालय की सुबह की प्राथर्ना में रोज ' संशोधित ' राष्ट्रगान गाते हैं। कुछ सप्ताह पहले…
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Added by shekhar jha on February 26, 2011 at 10:35am — No Comments

मजाक (मैथिली कथा) - जितमोहन झा...

हमरा गाम मे एगो पंडीजी काका छलाह, ओ एतेक मजाकिया छला जुनि पुछू .... मजाक करै मे दूर - दूर तक हुनक चर्चा होइ छन्हि ! सच पुछू तँ मजाक करै मे ओ किनको नञि छोड़ैत छथिन्ह !



एक दिनक बात छल हुनक अर्धांग्नी (पंडीतैन) हुनका कहलखिन अहाँ सभसँ मजाक करै छी ... एतऽ धरि जे मजाकक मामला मे दूर - दूर तक अहँक चर्चा होइत अछि ! मुदा अहाँ हमरासँ कहियो मजाक नञि केलहुँ ......



पंडीजी काका बजलाह ... देखू सुनेना के माय, ई बात सत्य अछि जे हम सभसँ मजाक करै छी ! एकर मतलब ई थोड़े ने की हम अहूँसँ मजाक करी…

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Added by Jitmohan Jha on February 25, 2011 at 11:39am — No Comments

मधुक एक ठोप (मैथिली कथा) - जितमोहन झा...

कुरुक्षेत्रक भीषण रक्तपातक बाद, अपन सभ पुत्र गवाँ चुकल शोकसँ संतृप्त धृतराष्ट्रक दुःख विदुरक समक्ष अश्रुधाराक रूपमे बहि निकललनि ! तखन ओऽ सेविका पुत्र (विदुर) हुनका समक्ष वर्तमान स्थितिक अनुकूल एक उपदेशात्मक नीति-कथाक वर्णन केलखिन !



विदुर कहलखिन "आइ एकटा ब्राह्मणक कथा अपनेकेँ बताबैत छलहुँ ! जे जंगली पशुसँ भड़ल जंगलमे पथ - भ्रमित भऽ गेलखिन रहए ! शेर आर चिता, हाथी आर भालूक चीख, चिंघाड़, आर गर्जनक एहन दृश्य जे मृत्युक देवता, यमोक मोनमे सिहरन पैदा कऽ दैतियनि! ब्राह्मणोकेँ ओऽ…

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Added by Jitmohan Jha on February 25, 2011 at 11:36am — No Comments

आनंद को सम्मानित...

तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में प्रवेश के लिए बिहार में कमजोर तबके के छात्रों को मुफ्त शिक्षा मुहैया कराने वाले कोचिंग सेंटर ' सुपर 30 ' के संस्थापक और गणितज्ञ आनंद कुमार को शनिवार को सम्मानित करेंगे।नोबेल पुरस्कार से सम्मानित दलाई लामा मुम्बई में एक संस्था ' बिहार फाउंडेशन के मुम्बई चेप्टर ' द्वारा आयोजित…

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Added by shekhar jha on February 25, 2011 at 11:09am — No Comments

मुझे पेंटिंग बनाने का शौक

शेखर झा 
 कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो इंसान सभी कामों को आसानी से कर सकते हैं, बस इंसान को अपने लक्ष्य से भटकना नहीं चाहिए। इंसान को हमेशा अपने लक्ष्य को देखते हुए काम करना चाहिए, इससे उसे सफलता जल्द मिल जाती है। ऐसा ही एक उदाहरण गुरू तेगबहादुर भवन में लगी प्रदर्शनी में देखने को मिला। खजुराहो (एमपी) से आए दिनेश सिंह एक से बढ़कर पेंटिंग्स बनाते हैं। वो मुख्यत: एक्रेलिक, आॅइल मीडियम की पेंटिंग बनाते हैं। इसमें भी उनकी कैनवास पर पकड़ अच्छी होने के साथ वो वेलवेट, कॉटन…
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Added by shekhar jha on February 25, 2011 at 11:08am — No Comments

कलाकारों को प्रोत्साहन

शेखर झा 
 राज्य के कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए टाटा स्टील के द्वारा चार दिवसीय ‘आर्ट इन इंडस्ट्री’ का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में नागपुर, जमशेदपुर, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, बैंग्लोर के अलावा छत्तीसगढ़ के भी विभिन्न जिलों के कलाकारों नें भाग लिया। किसी ने अपने चित्र में शांति का संदेश दिया, किसी ने पर्यटन स्थलों को दर्शाया। कौन कहता है कि पेंटिंग्स नहीं बोलती, कलाकारों के द्वारा बनाए गए हर चित्र कुछ कहते नजर आए। प्रदर्शनी में 25 कलाकारों के द्वारा विगत तीन…
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Added by shekhar jha on February 25, 2011 at 11:07am — No Comments

खिस्सा जीवनक (मैथिली कथा) - जितमोहन झा...

एक आदमीक घर एक सन्यासी पाहुन बनि कs एलखिन। रातिमे गपशपक बीच ओऽ संन्यासी आदमीसँ कहलखिन की अहाँ एहि ठाम ई छोट-मोट खेतीमे की लागल छी ! साइबेरियामे किछु दिन पहिने हम यात्रा पर रही, ओइ ठाम जमीन एतेक सस्ता अछि मानू अहाँकेँ मँगनीम्वे भेट जाएत! अहाँ अपन ई जमींन बेचि कऽ साइबेरिया चलि जाऊ ! ओहिठाम हजारो एकड़ जमीन भेट जाएत एतबे जमीनमे !



ओइ ठामक जमीन बड उपजाऊ छइ, आर ओइ ठामक लोक एतेक सीधा-साधा की करीब-करीब जमींन मुफ्तेमे दऽ देत! ओइ आदमीकेँ वासना जगलनि! ओऽ दोसरे दिन अपन सभ जमीन बेचि कऽ…

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Added by Jitmohan Jha on February 25, 2011 at 11:01am — No Comments

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